अमित शाह ने सिलीगुड़ी में SSB परियोजनाओं का किया शिलान्यास
सिलीगुड़ी: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सशस्त्र सीमा बल (SSB) की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने SSB के जवानों के साथ भी संवाद किया। गृह मंत्री ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत, भारत-नेपाल और भारत-भूटान की खुली सीमाओं की सुरक्षा तथा सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने में SSB की भूमिका को रेखांकित किया। उपरोक्त कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, IB निदेशक महेश दीक्षित, सीमा प्रबंधन सचिव डॉ. राजेंद्र कुमार और SSB के महानिदेशक संजय सिंघल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
SSB की परियोजनाओं पर ₹189 करोड़ का फोकस
अमित शाह ने सिलीगुड़ी स्थित SSB सीमांत मुख्यालय के प्रशासनिक भवन का शिलान्यास किया। यह भवन 80 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा 19वीं वाहिनी ठाकुरगंज का शिलान्यास, 12वीं वाहिनी किशनगंज का ई-शिलान्यास और न्यू जलपाईगुड़ी के पारगमन शिविर का शिलान्यास भी गृह मंत्री के द्वारा किया गया। इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब 189 करोड़ रुपये बताई गई है। गृह मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से SSB के जवानों के लिए प्रशासनिक और आवासीय सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब से वह गृह मंत्री बने हैं, SSB, BSF और असम राइफल्स जैसे सुरक्षा बलों की जरूरतें गृह मंत्रालय की प्राथमिकताओं में से एक रही हैं।
सिलीगुड़ी में अमित शाह ने क्या किया?
अमित शाह ने SSB की विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया और जवानों के साथ संवाद किया। इस कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य सीमा सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और SSB कर्मियों की प्रशासनिक व आवासीय सुविधाओं को बेहतर बनाना रहा। इस दौरान गृह मंत्री ने SSB की भूमिका को केवल सीमा पर निगरानी तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों और भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। यह कॉरिडोर आठ राज्यों और तीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं इसके आसपास हैं। इसी वजह से सिलीगुड़ी कॉरिडोर chicken neck के नाम से भी जाना जाता हैं और यही वजह है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को सुरक्षित रखना सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड के जरिए काम कर रही है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आमतौर पर भारत के बाकी हिस्सों को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण भू-भाग के रूप में देखा जाता है। इसकी संवेदनशील भौगोलिक स्थिति के कारण यहां सीमा सुरक्षा और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय महत्वपूर्ण है।
SSB की भूमिका और भारत की खुली सीमाएं
SSB की जिम्मेदारी भारत की कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की निगरानी से जुड़ी है। अमित शाह ने बताया कि 2001 से SSB भारत-नेपाल की 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा और 2004 से भारत-भूटान की लगभग 700 किलोमीटर लंबी सीमा पर तैनात है। इन सीमाओं की एक खासियत यह है कि कई हिस्सों में ये तार-बाड़ रहित और खुली हैं। गृह मंत्री ने कहा कि तार-बाड़ वाली सीमा की तुलना में खुली सीमा की निगरानी करना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने SSB के जवानों की जिम्मेदारी को इसी कारण कठिन बताया और सीमा सुरक्षा के साथ-साथ नेपाल और भूटान के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाने में बल की अहम भूमिका की भी सराहना की।
किन लोगों और क्षेत्रों पर इसका असर पड़ेगा?
SSB की नई परियोजनाओं और सीमा सुरक्षा से जुड़े फैसलों का प्रभाव कई स्तरों पर देखा जा सकता है।
SSB के जवान
सबसे सीधा फायदा SSB कर्मियों को मिलेगा। नए प्रशासनिक भवन, वाहिनी परिसर और ट्रांजिट कैंप जैसी परियोजनाओं से उनके कामकाजी और आवासीय बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
सीमावर्ती क्षेत्र
भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा से लगे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने का सीधा प्रभाव स्थानीय लोगों पर पड़ सकता है।
पूर्वोत्तर राज्य
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वोत्तर राज्यों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र है। इसलिए यहां सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में सुधार का महत्व व्यापक है।
राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था
सीमा पर निगरानी, घुसपैठ रोकने, तस्करी पर कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय को मजबूत करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
अमित शाह ने कौन-कौन से आंकड़े बताए?
अमित शाह ने अपने संबोधन में SSB की वर्तमान भूमिका और सरकार की सीमा सुरक्षा संबंधी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकार गठन के 45 दिनों के भीतर BSF और SSB के लिए 1,129 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई। साथ ही उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को पूरी तरह मजबूत करने के लिए केंद्र की एजेंसियों को 560 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी और इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की बात कही। गृह मंत्री ने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष: 2026-27 के बजट में स्वीकृत सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में दिल्ली-सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले वर्षों में दिल्ली और सिलीगुड़ी के बीच यात्रा समय कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा अमृत भारत योजना के तहत सिलीगुड़ी और जलपाईगुड़ी स्टेशनों के विकास तथा वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के जरिए सीमावर्ती गांवों को जोड़ने का भी उल्लेख किया गया।
SSB को मिली सबसे कठिन सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी
अमित शाह ने कहा कि ‘वन बॉर्डर, वन फोर्स’ नीति के बाद SSB को नेपाल और भूटान जैसे मित्र देशों से लगी खुली सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली हैं जो कि बहुत ही चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने आगे कहा कि जहां सीमा पर फेंसिंग होती है, वहां निगरानी की प्रकृति अलग होती है, लेकिन बिना तार-बाड़ वाली सीमा की निगरानी अधिक चुनौतीपूर्ण होती है। इसी वजह से उन्होंने SSB जवानों के काम को कठिन जिम्मेदारियों में शामिल किया। गृह मंत्री ने SSB की भूमिका को केवल सुरक्षा बल के रूप में नहीं, बल्कि नेपाल और भूटान के साथ भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाली संस्था के रूप में भी रेखांकित किया।
घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर सरकार का जोर
अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ रोककर बंगाल और देश को सुरक्षित बनाना सरकार का संकल्प है और सीमा पर फेंसिंग को उन्होंने इसका मजबूत उपाय बताया। उन्होंने SSB, BSF और ITBP को किसी राजनीतिक दल या सरकार की एजेंसी के बजाय देश की सीमा सुरक्षा करने वाले बल बताया और कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इन जवानों के साथ खड़ा होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी भारत की सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए 'त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड'
गृह मंत्री के अनुसार सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड की दिशा में काम किया है। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से जुड़ी सीमाओं पर निगरानी और सुरक्षा समन्वय महत्वपूर्ण है। सरकार का लक्ष्य सीमावर्ती क्षेत्रों में केवल सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाना नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और स्थानीय विकास को भी मजबूत करना है। वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम का उल्लेख इसी व्यापक रणनीति के संदर्भ में किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम का व्यापक महत्व
इस कार्यक्रम को मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के नजरिए से देखा जा सकता है। एक तरफ, SSB के लिए नए प्रशासनिक और आवासीय ढांचे से बल की operational क्षमता और जवानों की सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। दूसरी तरफ, सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। गृह मंत्री ने अपने संबोधन में सुरक्षा के साथ विकास को जोड़ते हुए हाई-स्पीड रेल, रेलवे स्टेशन विकास और सीमावर्ती गांवों की कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।
FAQ: अमित शाह का सिलीगुड़ी दौरा और SSB परियोजनाएं
Q1. अमित शाह सिलीगुड़ी क्यों पहुंचे?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी में SSB की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया तथा जवानों के साथ भी संवाद किया। साथ ही उन्होंने सीमा सुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रणनीतिक महत्व पर बात की।
Q2. SSB की नई परियोजनाओं की कुल लागत कितनी है?
सिलीगुड़ी में शुरू की गई नई SSB परियोजनाओं की कुल लागत करीब 189 करोड़ रुपये है।
Q3. किन SSB परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ?
SSB सीमांत मुख्यालय के प्रशासनिक भवन, 19वीं वाहिनी ठाकुरगंज और न्यू जलपाईगुड़ी के पारगमन शिविर का शिलान्यास किया गया। 12वीं वाहिनी किशनगंज का ई-शिलान्यास भी हुआ।
Q4. सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
Q5. SSB किन सीमाओं की सुरक्षा करती है?
SSB भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है। SSB 1,751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा और लगभग 700 किलोमीटर लंबी भारत-भूटान सीमा पर तैनात है।
Q6. क्या सिलीगुड़ी में सिर्फ सुरक्षा परियोजनाओं पर चर्चा हुई?
नहीं। अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के साथ रेलवे कनेक्टिविटी, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और सीमावर्ती गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम
सिलीगुड़ी में अमित शाह द्वारा SSB की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास सीमा सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। करीब 189 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं, SSB के प्रशासनिक और आवासीय ढांचे के विस्तार तथा सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पर जोर से केंद्र सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट होती हैं। सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक स्थिति, नेपाल-भूटान की खुली सीमाओं और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को देखते हुए SSB की भूमिका आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण बनी रहने की संभावना है। अमित शाह ने अपने संबोधन में SSB जवानों की कठिन जिम्मेदारी और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को रेखांकित किया। साथ ही सरकार ने सुरक्षा के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और विकास को आगे बढ़ाने की बात भी रखी है। ऐसे में सिलीगुड़ी में शुरू की गई ये परियोजनाएं केवल SSB के बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक सीमा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं।
Source: PIB