देवघर में तीसरी सोमवारी पर उमड़ा आस्था का सैलाब
देवघर: राजकीय श्रावणी मेले की तीसरी सोमवारी पर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का विशाल जनसैलाब देखने को मिला। सोमवार सुबह से ही बाबा नगरी में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कांवरियों और श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में हर तरफ “बोल बम” और “हर हर महादेव” के जयघोष सुनाई देते रहे। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, जलार्पण और भीड़ नियंत्रण के लिए व्यापक इंतजाम किए। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार तीसरी सोमवारी पर करीब चार से पांच लाख श्रद्धालुओं के देवघर पहुंचने की संभावना जताई गई थी। इस बार तीसरी सोमवारी का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि इसका संयोग नाग पंचमी के साथ रहा। सावन सोमवार और नाग पंचमी दोनों को भगवान शिव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह रही कि देवघर में श्रद्धालुओं की भीड़ और आस्था का उत्साह और अधिक नज़र आया।
तीसरे सोमवारी पर क्या हुआ?
श्रावणी मेले की तीसरी सोमवारी को सुबह तड़के से ही बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं थी। बड़ी संख्या में कांवरिए सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर अपनी पैदल यात्रा पूरी करने के बाद देवघर पहुंचे और बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित किया। मंदिर परिसर और कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पूरे इलाके में भक्तिमय माहौल बना रहा था। कांवरिए लगातार “बोल बम” का जयघोष करते हुए आगे बढ़ते नजर आए। भारी भीड़ के बावजूद जलार्पण की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन लगातार व्यवस्था की निगरानी करते रहे। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर की ओर भेजा गया, जबकि सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ा दी गई थी। तीसरी सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के पीछे नाग पंचमी का अद्भुत संयोग को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
तीसरी सोमवारी इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान सोमवार के दिन बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने के लिए देशभर से श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। तीसरे सोमवारी तक श्रावणी मेले का उत्साह अपने चरम पर पहुंचने लगता है। बड़ी संख्या में कांवरिए सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर अपनी यात्रा पूरी करते हुए देवघर पहुंचते हैं। इस बार तीसरी सोमवारी का महत्व नाग पंचमी के संयोग से और बढ़ गया। धार्मिक मान्यताओं में नाग पंचमी का संबंध भगवान शिव और नाग पूजा से जोड़ा जाता है। ऐसे में सावन सोमवार और नाग पंचमी के एक साथ पड़ने से श्रद्धालुओं में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला। यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, अपितु लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से देवघर और आसपास के क्षेत्रों में होटल, परिवहन, भोजनालय, स्थानीय बाजार और छोटे कारोबारियों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।
क्या है देवघर का श्रावणी मेला?
देवघर का राजकीय श्रावणी मेला देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवर यात्रा है। कांवरिए सुल्तानगंज में गंगा नदी से जल भरते हैं और उसे लेकर पैदल देवघर पहुंचते हैं। यह दूरी लगभग 105 से 108 किलोमीटर मानी जाती है। इसीलिए इस यात्रा मार्ग को 'कांवरिया पथ' भी कहा जाता है। कांवरिए इस पूरी यात्रा के दौरान धार्मिक नियमों और अनुशासन का पालन करते हुए बाबा बैद्यनाथ को गंगाजल अर्पित करते हैं। श्रावणी मेले के दौरान देवघर और सुल्तानगंज के बीच का पूरा मार्ग कांवरियों से भर जाता है। इस वजह से प्रशासन के सामने सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और भीड़ नियंत्रण जैसी बड़ी चुनौतियां रहती हैं।
तीसरे सोमवारी पर किन-किन लोगों की बड़ी भूमिका रही?
तीसरे सोमवारी के दौरान सबसे ज्यादा असर और जिम्मेदारी इन वर्गों पर रही:
कांवरिए और श्रद्धालु
देश के विभिन्न राज्यों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलार्पण किया। इनमें झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु भी शामिल रहे।
प्रशासन और सुरक्षा बल
भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों को लगातार निगरानी करनी पड़ी। मंदिर क्षेत्र, कांवरिया पथ और प्रमुख प्रवेश-निकास मार्गों पर विशेष व्यवस्था की गई।
स्थानीय कारोबारी
श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से होटल, धर्मशाला, भोजनालय, परिवहन, पूजा सामग्री और स्थानीय दुकानदारों के कारोबार में तेजी आती है।
तीसरी सोमवारी पर क्या रही प्रशासनिक व्यवस्था?
तीसरी सोमवारी पर अनुमानित भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारी की थी।
करीब चार से पांच लाख श्रद्धालुओं की संभावना
प्रशासन की ओर से तीसरी सोमवारी पर लगभग चार से पांच लाख श्रद्धालुओं के देवघर पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए भीड़ प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई।
लंबी कतारों में श्रद्धालु
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। घंटों इंतजार के बावजूद भक्त अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
सुरक्षा और निगरानी
भीड़ नियंत्रण के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई। मंदिर क्षेत्र और प्रमुख मार्गों पर लगातार निगरानी रखी गई। प्रशासन ने रूट मैनेजमेंट और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया।
मेडिकल और आपात व्यवस्था
भारी भीड़ वाले धार्मिक आयोजन में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए मेडिकल सहायता और आपात सेवाओं की व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी गई।
VIP दर्शन पर सख्ती
सामान्य श्रद्धालुओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रशासन ने VIP कल्चर और शीघ्रदर्शनम व्यवस्था को लेकर भी सख्ती बरतने की बात कही। इसका उद्देश्य आम श्रद्धालुओं को जलार्पण में कम से कम परेशानी देना था।
श्रद्धालुओं और प्रशासन की क्या रही भूमिका?
तीसरी सोमवारी पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई कांवरियों का कहना था कि लंबी दूरी की यात्रा, गर्मी और भीड़ के बावजूद बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलार्पण की भावना उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। दूसरी तरफ प्रशासन के लिए इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती रहा। लाखों लोगों की आवाजाही के बीच किसी भी तरह की भगदड़, ट्रैफिक जाम या स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति को रोकना प्राथमिकता रही। प्रशासन की कोशिश रही कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से मंदिर तक पहुंचाया जाए और जलार्पण की प्रक्रिया बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रहे। तीसरी सोमवारी पर श्रद्धालुओं के सहयोग ने भी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबी कतारों में इंतजार करने के बावजूद अधिकांश श्रद्धालु अनुशासन के साथ अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।
देवघर श्रावणी मेला 2026:FAQ
Q1. देवघर श्रावणी मेला 2026 कब से कब तक चल रहा है?
इस वर्ष राजकीय श्रावणी मेला 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक चलने की जानकारी दी गई है।
Q2. तीसरी सोमवारी पर देवघर में कितने श्रद्धालु पहुंचे?
प्रशासन की ओर से तीसरी सोमवारी पर करीब चार से पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया गया था।
Q3. तीसरी सोमवारी इस बार खास क्यों रही?
इस बार तीसरी सोमवारी का संयोग नाग पंचमी के साथ रहा। सावन सोमवार और नाग पंचमी दोनों को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसके कारण श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
Q4. कांवरिए सुल्तानगंज से देवघर तक कितनी दूरी तय करते हैं?
कांवरिए सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लगभग 105 से 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करते हैं।
Q5. क्या श्रावणी मेले में स्पर्श पूजा की अनुमति है?
इस वर्ष श्रावणी मेले के दौरान बाबा बैद्यनाथ मंदिर में स्पर्श पूजा पर रोक लागू होने की जानकारी दी गई है। श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जलार्पण कराया जाता है।
Q6. देवघर में तीसरी सोमवारी पर कैसी सुरक्षा व्यवस्था रही?
भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती, रूट मैनेजमेंट, ट्रैफिक नियंत्रण, भीड़ निगरानी और मेडिकल सहायता जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
Q7. देवघर श्रावणी मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
श्रावणी मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने से होटल, धर्मशाला, भोजनालय, परिवहन, पूजा सामग्री और स्थानीय दुकानों के कारोबार में तेजी आती है। इस तरह मेला धार्मिक आयोजन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Q8. क्या आने वाले दिनों में भी देवघर में भीड़ बढ़ सकती है?
श्रावण महीने के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहती है। आने वाली सोमवारी और प्रमुख धार्मिक तिथियों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है।
बाबा नगरी में आस्था का महासैलाब
देवघर श्रावणी मेले की तीसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ धाम में उमड़ी भारी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि सावन का महीना देशभर के शिव भक्तों के लिए कितना खास है। लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं ने कठिन यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जलार्पण किया। इस बार नाग पंचमी के संयोग ने तीसरी सोमवारी की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा दिया। सुल्तानगंज से देवघर तक कांवरियों की यात्रा और बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण ने पूरे इलाके को भक्तिमय बना दिया। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती रही। सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक, मेडिकल सहायता और जलार्पण व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल जरूरी रहा। देवघर की श्रावणी मेला परंपरा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों को एक सूत्र में जोड़ने वाला विशाल जनपर्व भी है। तीसरी सोमवारी पर बाबा नगरी में दिखा यह नजारा आने वाले दिनों में भी जारी रहने वाली शिवभक्ति और आस्था की विशाल परंपरा की झलक देता है।