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अमेरिकी PPI आंकड़ों का असर, सोने की कीमतों में गिरावट थमी; Fed के रेट के फैसले पर बाजार की नजर

अमेरिकी PPI आंकड़ों का असर, सोने की कीमतों में गिरावट थमी; Fed के रेट के फैसले पर बाजार की नजर

अमेरिकी PPI के ताजा आंकड़ों से सोने की कीमतों में गिरावट थमती नजर आई। जानिए Fed की ब्याज दर नीति और Gold Price पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के ताजा आंकड़ों के बाद सोने की कीमतों में शुरुआती गिरावट कुछ कम हुई है। बाजार में अब यह उम्मीद पूर्णरूप से मजबूत हो रही है, कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी से फिलहाल दूरी बनाए रख सकता है। गुरुवार को सोना करीब 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया। हालांकि, 4,500 डॉलर के स्तर के पास मुनाफावसूली और तकनीकी प्रतिरोध के कारण कीमतों पर दबाव भी बना हुआ है।

अमेरिकी PPI आंकड़ों ने बाजार को दिया राहत का संकेत

अमेरिका में जुलाई 2026 का Producer Price Index यानी PPI मासिक आधार पर स्थिर रहा। जबकि इसमें करीब 0.2 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन वास्तविक आंकड़ा उम्मीद से कमजोर रहा। जून में PPI में संशोधित आधार पर 0.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। सालाना आधार पर अमेरिकी PPI जुलाई में 4.7 फीसदी बढ़ा, जबकि जून में इसकी वार्षिक वृद्धि 5.5 फीसदी थी। इसका मतलब है कि उत्पादक स्तर पर कीमतों का दबाव कुछ कम हुआ है। अमेरिका में, PPI को महंगाई का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है, ठीक वैसे ही जैसे भारत में WPI, क्योंकि PPI उत्पादन और थोक स्तर पर कीमतों में होने वाले बदलाव को दर्शाता है। अगर उत्पादकों की लागत लगातार बढ़ती है तो उसका असर आगे चलकर उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसलिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व PPI समेत कई आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखता है।

सितंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कमजोर

PPI के आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब निवेशक अमेरिकी फेड की अगली मौद्रिक नीति को लेकर काफी सतर्क हैं। हाल के आर्थिक आंकड़ों में महंगाई के दबाव में कुछ नरमी और रोजगार बाजार में कमजोरी के संकेत मिलने के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को लेकर बाजार की धारणा काफी बदल चुकी है। ताजा PPI आंकड़ों के बाद सितंबर में Fed की दर बढ़ोतरी की बाजार संभावना करीब 32 फीसदी तक गिर गई, जबकि आंकड़े जारी होने से पहले यह लगभग 40 फीसदी थी। यानी निवेशकों का एक बड़ा हिस्सा अब मान के चल रहा है कि फेड सितंबर में दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ब्याज दरों को लेकर जोखिम पूरी तरह समाप्त हो गया है। फेड के अधिकारी महंगाई के भविष्य के रुख और आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए अपना रुख बदल सकते हैं।

सोने की कीमतों पर क्या पड़ा असर?

PPI के आंकड़े जारी होने के बाद सोने में शुरुआती कमजोरी देखने को मिली, लेकिन बाद में कीमतों ने कुछ नुकसान की भरपाई कर ली। अपने कारोबार के दौरान , स्पॉट गोल्ड करीब 0.5 फीसदी गिरकर 4,386.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था। लेकिन एक समय यह 4,363.44 डॉलर तक भी फिसला, लेकिन बाद में इसमें सुधार हुआ। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स करीब 4,444 डॉलर प्रति औंस पर रहे। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का एक बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा है। सोना कोई ब्याज या नियमित आय देने वाली संपत्ति नहीं है। ऐसे में जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशकों को बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों में निवेश करने का आकर्षण बढ़ सकता है। इसके उलट ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद सोने के लिए सकारात्मक माहौल बना सकती है। इसी वजह से बाजार में सितंबर की Fed नीति को लेकर बदलती उम्मीदें सोने की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण बन गई हैं।

4,500 डॉलर का स्तर बना महत्वपूर्ण प्रतिरोध

सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बावजूद 4,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर बाजार के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। इस स्तर के आसपास निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली देखने को मिल रही है। सोने में हालिया तेजी के बाद कुछ निवेशकों ने मुनाफा बुक किया, जिससे कीमतों में दबाव आया। हालांकि, अमेरिकी महंगाई के अपेक्षाकृत नरम संकेतों ने गिरावट को सीमित करने में मदद की। अगर सोना 4,500 डॉलर के ऊपर टिकाऊ मजबूती हासिल करता है तो बाजार में नई तेजी की उम्मीद बढ़ सकती है। वहीं, इस स्तर को पार करने में लगातार असफलता रहने पर निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं और कीमतों में कुछ और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की नजर

PPI के अलावा निवेशक अमेरिकी Consumer Price Index यानी CPI को भी बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में अमेरिकी उपभोक्ता महंगाई सालाना आधार पर 3.4 फीसदी रही, जो पिछले महीने के 3.5 फीसदी से थोड़ी कम है। इससे भी महंगाई के दबाव में मामूली नरमी के संकेत मिले हैं। PPI और CPI दोनों आंकड़ों में आने वाली दिशा अमेरिकी फेड के अगले फैसलों को प्रभावित कर सकती है। यदि आने वाले आंकड़ों में महंगाई लगातार नरम होती है, तो फेड के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी से बचने की गुंजाइश बढ़ सकती है। इसके विपरीत यदि आने वाले महीनों में महंगाई दोबारा तेज होती है तो केंद्रीय बैंक को सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर भी नजर

सोने की कीमतों को समझने के लिए अमेरिकी डॉलर और Treasury yields को देखना भी जरूरी है। आम तौर पर मजबूत डॉलर सोने के लिए दबाव पैदा कर सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना डॉलर में कारोबार करता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो सकता है।

इसी तरह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव भी सोने की मांग को प्रभावित करता है। अगर निवेशकों को बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है तो गैर-ब्याज वाली संपत्ति के रूप में सोने की आकर्षकता कम हो सकती है। दूसरी तरफ यील्ड में गिरावट और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद सोने के लिए सहायक साबित हो सकती है। PPI के नरम आंकड़ों के बाद अमेरिकी ब्याज दरों के अनुमान में बदलाव ने सोने को शुरुआती गिरावट से उबरने में मदद की है।

अन्य कीमती धातुओं में भी गिरावट

गुरुवार के कारोबार में केवल सोना ही नहीं, बल्कि अन्य कीमती धातुओं में भी दबाव देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार चांदी करीब 0.3 फीसदी, प्लैटिनम 1.7 फीसदी और पैलेडियम लगभग 3.6 फीसदी नीचे रहे। इससे पता चलता है कि व्यापक कीमती धातु बाजार में निवेशकों की गतिविधियां काफी सक्रिय बनी हुई हैं।

हालांकि, सोने को आमतौर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौरान सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखा जाता है। इसलिए ब्याज दरों के अलावा वैश्विक तनाव, डॉलर की दिशा, केंद्रीय बैंकों की खरीद और निवेशकों की जोखिम धारणा भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

आगे क्या रहेगा सोने का रुख?

आने वाले दिनों में सोने की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी फेड की ब्याज दर संबंधी उम्मीदों, महंगाई के नए आंकड़ों और डॉलर-बॉन्ड यील्ड की चाल पर निर्भर रह सकती है। मौजूदा स्थिति में PPI का स्थिर रहना बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे तत्काल ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका कुछ कम हुई है। हालांकि, सोने की कीमत पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। इसलिए तेजी के बीच मुनाफावसूली और अचानक गिरावट की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या महंगाई में नरमी का यह रुझान आगे भी जारी रहता है। यदि ऐसा होता है तो अमेरिकी फेड पर ब्याज दरों को स्थिर रखने का दबाव बढ़ सकता है, जिसका फायदा सोने को मिल सकता है। दूसरी ओर, महंगाई में दोबारा तेजी आने पर ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना फिर मजबूत हो सकती है और इससे सोने पर दबाव बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

अमेरिकी जुलाई PPI का स्थिर रहना और वार्षिक PPI वृद्धि का 5.5 फीसदी से घटकर 4.7 फीसदी होना बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। इस आंकड़े ने फिलहाल अमेरिकी फेड द्वारा सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद को कमजोर किया है। इसका असर सोने के बाजार में भी देखने को मिला, जहां शुरुआती गिरावट के बाद कीमतों ने कुछ नुकसान की भरपाई की। फिलहाल सोने के लिए 4,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण बना हुआ है, जबकि अमेरिकी महंगाई और फेड की अगली नीति बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। निवेशकों को आने वाले आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के संकेतों पर खास नजर रखनी होगी। 

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य बाजार जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। इसमें दी गई जानकारी को निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। सोने और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें तभी कोई निवेश का निर्णय ले। 

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