अहमदाबाद: गुजरात में एक बार फिर चंडीपुरा वायरस (Chandipura Virus - CHPV) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार के अनुसार, इस मानसून सीजन में अब तक कई संदिग्ध मामलों की जांच की गई है, जिनमें 35 मामलों में चंडीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है, राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक लगभग 22 बच्चों की मौत इस संक्रमण से हो चुकी है तथा कुल 184 संदिग्ध मामलों में से 35 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है,जबकि कुछ का इलाज अभी अस्पतालों में चल रहा है। । अधिकांश प्रभावित बच्चे 15 वर्ष से कम आयु के हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और रोकथाम के उपाय तेज कर दिए हैं। यह वायरस तेजी से मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES)का कारण बनता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और अस्पताल में उपचार से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।
क्या है चंडीपुरा वायरस?
चंडीपुरा वायरस (CHPV) एक Rhabdoviridae परिवार का वायरस है। इसकी पहचान पहली बार वर्ष 1965 में महाराष्ट्र के चंडीपुरा गांव में हुई थी, जिसके नाम पर इसका नाम रखा गया। यह वायरस मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है और मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) पैदा कर सकता है। भारत में समय-समय पर महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में इसके प्रकोप सामने आते रहे हैं।
गुजरात में क्या है ताजा स्थिति?
गुजरात सरकार के अनुसार मानसून के दौरान राज्य में चंडीपुरा वायरस के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
- 184 संदिग्ध मामलों की जांच की गई।
- 35 मामलों में वायरस की पुष्टि हुई।
- 22 बच्चों की मौत इस संक्रमण से जुड़ी बताई गई है।
- प्रभावित बच्चों की उम्र अधिकांशतः 15 वर्ष से कम है।
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में मेडिकल टीमों को तैनात किया है, घर-घर सर्वे, कीटनाशक छिड़काव और जागरूकता अभियान शुरू किए हैं।
यह वायरस कैसे फैलता है?
विशेषज्ञों के अनुसार चंडीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई(बालू मक्खी) के काटने से से फैलता है। यह वायरस मुख्यतः सैंड फ्लाई से फैलता है तथापि कुछ शोधों में अन्य कीटों की भूमिका पर भी अध्ययन जारी है, लेकिन सैंड फ्लाई को इसका प्रमुख वाहक माना जाता है। अभी तक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैलने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।
सैंड फ्लाई आमतौर पर इन स्थानों पर पाई जाती है:
- गंदगी वाले क्षेत्र
- मिट्टी या कच्ची दीवारों की दरारें
- नम और अंधेरी जगहें
- पशुओं के आसपास का वातावरण
चंडीपुरा वायरस के लक्षण
संक्रमण के शुरुआती मुख्य लक्षण है: सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी बहुत तेजी से गंभीर रूप ले सकती है।
मुख्य लक्षण:
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- उल्टी
- कमजोरी
- दौरे (Seizures)
- बेहोशी
- भ्रम की स्थिति
- मस्तिष्क में सूजन
विशेषज्ञों के अनुसार यदि बच्चे में तेज बुखार के साथ दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
बच्चों को अधिक खतरा क्यों?
चंडीपुरा वायरस का सबसे अधिक असर 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर देखा गया है। बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण संक्रमण तेजी से गंभीर हो सकता है। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में स्वास्थ्य विभाग बच्चों की निगरानी पर विशेष जोर दे रहा है और तमाम ऐतिहात बरतने के निर्देश जारी किये जा रहे है ताकि बच्चों को इस संक्रमण से दूर रखा जा सके।
क्या इसका इलाज या वैक्सीन उपलब्ध है?
फिलहाल चंडीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर उपचार देते हैं, जिसमें शामिल हो सकते हैं:
- बुखार नियंत्रित करना
- शरीर में पानी की कमी रोकना
- दौरे नियंत्रित करना
- आईसीयू में निगरानी
- मस्तिष्क पर बढ़ते दबाव का उपचार
समय पर अस्पताल पहुंचना मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
चूंकि वायरस का कोई निश्चित इलाज या वैक्सीन नहीं है, इसलिए बचाव सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह:
- घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
- कीटनाशकों का नियमित छिड़काव कराएं।
- बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं।
- सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
- गंदगी और जलभराव से बचें।
- तेज बुखार या दौरे आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
स्वास्थ्य विभाग ने क्या कदम उठाए?
गुजरात सरकार ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार संदिग्ध मरीजों की पहचान, सैंपल जांच, संपर्क में आए लोगों की निगरानी और जागरूकता अभियान चला रही हैं। अस्पतालों को भी सतर्क रहने और गंभीर मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष
गुजरात में चंडीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मानसून के दौरान संक्रामक रोगों के प्रति सतर्क रहना बेहद जरूरी है। यह वायरस दुर्लभ जरूर है, लेकिन बच्चों में तेजी से यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। समय पर पहचान, शीघ्र उपचार और साफ-सफाई जैसी सावधानियां संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभिभावकों से अपील कर रहे हैं कि यदि बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
स्रोत: गुजरात स्वास्थ्य विभाग, WHO एवं प्रकाशित चिकित्सा शोध रिपोर्टें।